Senior Citizen Railway – भारतीय रेलवे, जो देश की जीवनरेखा मानी जाती है, ने एक बार फिर अपने बुजुर्ग यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दिया है। लंबे इंतजार के बाद अब वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा में किराए की रियायत का लाभ दोबारा मिलने जा रहा है। यह निर्णय उन लाखों बुजुर्गों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है जो सीमित आय में जीवन यापन करते हुए यात्रा के खर्च से परेशान थे। रेलवे का यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में बुजुर्गों के सम्मान और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देने का भी संकेत है।
वर्ष 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में आई, तब भारतीय रेलवे ने भी कई कठोर निर्णय लेने पड़े। उस दौरान यात्री सेवाओं में भारी कटौती की गई और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली किराया रियायत को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। रेलवे की आर्थिक स्थिति और यात्रियों की कम संख्या को देखते हुए यह फैसला जरूरी था, लेकिन इससे बुजुर्ग यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अब जब देश में हालात सामान्य हो चुके हैं और रेलवे नेटवर्क पूरी क्षमता से चल रहा है, तो यह रियायत फिर से बहाल करने का समय आ गया था।
महामारी के बाद रेलवे ने धीरे-धीरे अपनी सेवाओं को पुनर्जीवित किया और यात्रियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। इस सकारात्मक माहौल में रेलवे प्रशासन ने यह महसूस किया कि बुजुर्ग नागरिकों को दोबारा वह सुविधाएं मिलनी चाहिए जो उन्हें पहले मिलती थीं। प्रशासन ने इस दिशा में गंभीरता से विचार-विमर्श किया और अंततः यह सराहनीय निर्णय लिया। यह फैसला रेलवे की उस नीति का हिस्सा है जो हमेशा समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को सहारा देने की बात करती है।
इस योजना के अंतर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुष यात्री लाभ उठा सकेंगे, जबकि महिलाओं के लिए यह आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित की गई है। ट्रांसजेंडर समुदाय के वरिष्ठ सदस्यों को भी इस सुविधा में शामिल किया गया है, जो एक समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है। छूट की दर यात्रा की दूरी और ट्रेन की श्रेणी के अनुसार 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है। यह राशि विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्राओं में बुजुर्गों के लिए काफी राहतदायक साबित होगी।
यह सुविधा केवल साधारण ट्रेनों तक सीमित नहीं है, बल्कि मेल, एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रतिष्ठित और तेज गति वाली ट्रेनों में भी उपलब्ध रहेगी। इसका मतलब यह है कि बुजुर्ग यात्री अब प्रमुख शहरों के बीच आरामदायक और तेज यात्रा भी कम खर्च में कर सकेंगे। पहले कई बुजुर्ग इन ट्रेनों का महंगा किराया देखकर यात्रा टाल देते थे या साधारण ट्रेनों में असुविधाजनक सफर करते थे। अब इस छूट के साथ उनकी यह समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।
बुजुर्गों की यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे ने निचली बर्थ की प्राथमिकता नीति को भी फिर से लागू किया है। अधिक उम्र में ऊपरी बर्थ पर चढ़ना न केवल कठिन होता है बल्कि खतरनाक भी हो सकता है, खासकर जब ट्रेन चलती हो। सिस्टम अब स्वचालित रूप से सीनियर सिटीजन यात्रियों को उपलब्धता के अनुसार निचली बर्थ आवंटित करने का प्रयास करता है। इससे बुजुर्ग यात्रियों को न केवल आराम मिलेगा बल्कि उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को सरल और सुलभ रखा गया है ताकि बुजुर्ग यात्रियों को किसी अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े। यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट, मोबाइल एप्लीकेशन या नजदीकी रेलवे टिकट काउंटर से आसानी से टिकट ले सकते हैं। बुकिंग के समय सही आयु दर्ज करना जरूरी है ताकि छूट स्वचालित रूप से लागू हो जाए। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कोई अलग आवेदन या पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है।
यात्रा के दौरान पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है, क्योंकि टिकट जांच के समय आयु का सत्यापन किया जा सकता है। आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट या रेलवे द्वारा मान्यता प्राप्त कोई भी सरकारी पहचान पत्र इस काम आ सकता है। गलत जानकारी देकर छूट प्राप्त करने की कोशिश करने पर जुर्माने का प्रावधान है, इसलिए यात्रियों को ईमानदारी से सही जानकारी देनी चाहिए। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि वास्तविक जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को ही इस सुविधा का लाभ मिले।
रेलवे ने यात्रा के अलावा स्टेशनों पर भी बुजुर्गों के लिए कई विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। व्हीलचेयर सेवा, सहायक कर्मचारी और बुजुर्गों के लिए अलग प्रतीक्षा क्षेत्र जैसी व्यवस्थाएं पहले से ही मौजूद हैं। किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए रेलवे की हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क किया जा सकता है, जो चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। इन सब सुविधाओं को मिलाकर रेलवे ने बुजुर्ग यात्रियों के लिए एक संपूर्ण और सम्मानजनक यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि सरकार और रेलवे प्रशासन वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों के प्रति जागरूक और संवेदनशील हैं। हमारे देश में बुजुर्गों को परिवार और समाज का अभिन्न अंग माना जाता है, और उनकी सुविधा का ध्यान रखना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। किराए में यह छूट उन बुजुर्गों के लिए वरदान साबित होगी जो तीर्थयात्रा, परिवार से मिलने या चिकित्सा कारणों से यात्रा करते हैं। रेलवे का यह कदम निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक संदेश देता है और आने वाले समय में बुजुर्गों के जीवन को थोड़ा और सरल बनाएगा।








