होली पर लगेगा चंद्र ग्रहण, ये राशि वाले संभलकर मनाएं त्योहार । Holi

By shreya

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Holi – होली का त्योहार भारतीय संस्कृति में सबसे जीवंत और आनंदमय उत्सवों में से एक माना जाता है। यह पर्व न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक भी है। साल 2026 की होली इस बार एक अद्भुत खगोलीय घटना के साथ मिलकर और भी विशेष बन गई है। 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा की रात आकाश में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिलेगा, जो सदियों में कभी-कभी ही संयोग से घटित होता है।

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इस बार होलिका दहन की रात आकाश में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा को पूरी तरह ढक लेती है, तो चंद्रमा का रंग धीरे-धीरे गहरा होकर लाल-नारंगी हो जाता है। इसी कारण वैज्ञानिक जगत में इसे ‘ब्लड मून’ का नाम दिया गया है। यह दृश्य इतना मनमोहक और रहस्यमय होता है कि देखने वाला अनायास ही रुककर आकाश की तरफ देखता रह जाता है।

खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत की भूमि से स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। जब भी कोई ग्रहण भारत में दृश्यमान होता है, तो उसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से इस ग्रहण का सूतक काल पूरी तरह मान्य होगा। इसलिए इस वर्ष की होली केवल रंग और गुलाल का उत्सव नहीं, बल्कि एक आत्मिक जागरण का अवसर भी बन गई है।

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चंद्रमा, मन और हमारा जीवन

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मनुष्य के मन, भावनाओं और आंतरिक स्थिति का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। जब चंद्रमा पर ग्रहण पड़ता है, तो यह प्रभाव केवल आकाश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी अनुभूति हमारी मनोदशा, हमारे संबंधों और हमारे स्वास्थ्य में भी महसूस की जा सकती है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इस तथ्य को गहराई से समझा था और इसीलिए उन्होंने ग्रहण काल में विशेष अनुशासन अपनाने का विधान बनाया।

आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न करती है। मानव शरीर में भी जल का एक बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए यह मानना अनुचित नहीं कि पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय हमारे शरीर और मन पर कुछ सूक्ष्म प्रभाव पड़ते हैं। यही कारण है कि इस दिन शांत मन, संतुलित आहार और सकारात्मक विचारों को अपनाने की सलाह दी जाती है। व्यक्ति अगर इन बातों का ध्यान रखे, तो ग्रहण काल उसके लिए नकारात्मक नहीं, बल्कि एक शुद्धिकरण का समय बन सकता है।


राशियों पर क्या होगा असर?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ेगा। कन्या राशि के जातकों को इस दौरान अपने व्यापार और आर्थिक मामलों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। अचानक होने वाले खर्च या कामकाज में रुकावट से परेशान होने की बजाय धैर्य से काम लेना ज्यादा उचित होगा। छोटी-छोटी बाधाओं को सहजता से स्वीकार कर आगे बढ़ना ही इस समय की सबसे बड़ी समझदारी है।

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मकर राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा सतर्कतापूर्ण रह सकता है, विशेष रूप से शत्रु पक्ष और वाहन से जुड़े मामलों में। किसी भी विवाद में उलझने से बचना और शांत स्वभाव के साथ निर्णय लेना इस राशि के लिए फायदेमंद रहेगा। मीन राशि के लोगों को अपनी सेहत पर ध्यान देना होगा क्योंकि मानसिक थकान या तनाव इस दौरान बढ़ सकता है। हालांकि यह समय स्थायी नहीं है, थोड़े से विवेक और देखभाल से सब कुछ सामान्य हो जाएगा।


परंपराएं जो आज भी प्रासंगिक हैं

भारतीय संस्कृति में ग्रहण काल को लेकर सदियों पुरानी परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। यह परंपराएं केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि इनके पीछे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी छिपे हुए हैं। ग्रहण काल में भोजन न करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इस दौरान सूर्य या चंद्र की किरणें कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे भोजन में बैक्टीरिया की वृद्धि तेज हो सकती है। इसी प्रकार नए कार्य या महत्वपूर्ण निर्णय टालने के पीछे भी मनोवैज्ञानिक शांति बनाए रखने का भाव है।

मंदिरों के कपाट बंद करने और मूर्तियों का स्पर्श न करने की परंपरा भी इसी भावना से जुड़ी है कि ग्रहण काल में बाहरी गतिविधियां कम करके आंतरिक साधना की जाए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इस नाजुक अवस्था में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त दबाव या असंतुलन हानिकारक हो सकता है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी यह समय आराम और शांति में बिताना ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।

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ध्यान, साधना और आत्मिक जागरण

ग्रहण काल को आध्यात्मिक दृष्टि से एक अत्यंत शक्तिशाली समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान किया गया मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर स्मरण का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। यह समय मन को बाहरी शोरगुल से हटाकर भीतर की ओर मोड़ने का सबसे उचित अवसर है। इसलिए जो लोग आध्यात्मिक मार्ग पर चलना चाहते हैं, उनके लिए यह ग्रहण एक वरदान की तरह है।

होली जैसे रंगारंग पर्व के साथ यदि ऐसी आत्मिक शांति का संगम हो जाए, तो यह अनुभव जीवन में एक अलग ही गहराई ला देता है। बाहर रंगों की फुहार हो और भीतर ध्यान की शांत धारा बहे, तो यह होली वास्तव में अविस्मरणीय बन सकती है। इस ग्रहण को भय और चिंता से नहीं, बल्कि जागरूकता और सकारात्मकता के साथ जीएं। यही इस दुर्लभ खगोलीय अवसर का सबसे सुंदर और सार्थक उपयोग होगा।


रंग और ब्रह्मांड का अनोखा मेल

इस वर्ष की होली इतिहास में इसलिए दर्ज हो जाएगी क्योंकि एक तरफ आकाश में लाल चांद चमकेगा और दूसरी तरफ धरती पर लाल-गुलाबी रंगों की बरसात होगी। यह संयोग मात्र एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रकृति का एक अद्भुत संदेश है कि ब्रह्मांड और मानव जीवन आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। होली का उत्सव हमें याद दिलाता है कि जीवन में रंग भरने के लिए हमें एकजुट होना होगा, मतभेद भुलाने होंगे और प्रेम को प्राथमिकता देनी होगी।

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तो इस बार होली खेलते समय एक पल रुककर आकाश की तरफ देखिए जहां ब्लड मून की लाल रोशनी बिखरी होगी। उस लाल रंग में भी होली का उल्लास ढूंढिए और महसूस कीजिए कि यह पूरा ब्रह्मांड आपके साथ मिलकर होली का जश्न मना रहा है। यही भावना इस होली 2026 को बाकी सभी होलियों से अलग और विशेष बनाती है। इसे मनाइए, इसे जीजिए और इसकी यादें अपने दिल में हमेशा के लिए संजो लीजिए।

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