PM Kisan – भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र को माना जाता है और इस क्षेत्र से जुड़े किसान देश के सबसे महत्वपूर्ण वर्गों में से एक हैं। खेती-किसानी से जुड़ी चुनौतियां जैसे मौसम की मार, बाजार में उतार-चढ़ाव और उत्पादन लागत में वृद्धि किसानों की आर्थिक स्थिति को अक्सर कमजोर कर देती हैं। इन्हीं परेशानियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐसी योजना की शुरुआत की जो सीधे किसानों की जेब तक पैसा पहुंचाती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज लाखों किसान परिवारों के लिए आर्थिक संबल का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है।
योजना का मूल उद्देश्य और महत्व
इस योजना के पीछे सरकार की सोच यह थी कि किसानों को बिचौलियों के जरिए नहीं बल्कि सीधे उनके बैंक खाते में सहायता राशि मिले। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी का इस्तेमाल किया जाता है, जो भ्रष्टाचार की संभावना को लगभग खत्म कर देता है। पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है जो तीन बराबर किस्तों में यानी हर बार 2000 रुपये के रूप में दी जाती है। यह राशि छोटी लग सकती है लेकिन बीज, खाद और अन्य जरूरतों के लिए समय पर मिलने वाली यह मदद किसानों के लिए बेहद अहम साबित होती है।
21वीं किस्त और 22वीं किस्त का इंतजार
नवंबर 2025 में 21वीं किस्त जारी की गई थी जिससे करोड़ों किसानों के खाते में 2000 रुपये की राशि पहुंची। उस किस्त के बाद से ही देशभर के किसान अगली यानी 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। विभिन्न सूत्रों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार फरवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में यह राशि जारी हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे केवल सरकारी वेबसाइट और आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें।
किन किसानों को मिलती है यह सुविधा
इस योजना का लाभ हर किसान को नहीं मिलता, इसके लिए कुछ निश्चित शर्तें और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि लाभार्थी किसान भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके नाम पर कृषि योग्य भूमि का रिकॉर्ड होना चाहिए। राज्य सरकार के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर किसान का नाम और जमीन की जानकारी सही और अपडेट होनी जरूरी है, वरना आवेदन अस्वीकृत हो सकता है।
यदि किसान के परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी है या परिवार का कोई सदस्य आयकर के दायरे में आता है, तो वह परिवार इस योजना के लिए अपात्र माना जाता है। इसके अलावा जो किसान संवैधानिक पदों पर रह चुके हों या बड़े पेंशनधारी हों, उन्हें भी इस योजना का लाभ नहीं मिलता। यह सुनिश्चित किया जाता है कि सहायता वास्तव में जरूरतमंद और छोटे किसानों तक ही पहुंचे।
ई-केवाईसी क्यों है इतनी जरूरी
आज के डिजिटल युग में सरकार ने ई-केवाईसी को इस योजना के लिए अनिवार्य कर दिया है और इसके बिना किसी भी किसान को किस्त नहीं मिलती। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि लाभार्थी की पहचान सत्यापित हो और फर्जी नामों पर पैसा न जाए। जो किसान ई-केवाईसी नहीं कराते, उनकी किस्त रोक दी जाती है चाहे वे योजना में पहले से पंजीकृत क्यों न हों।
ई-केवाईसी कराने की प्रक्रिया काफी सरल है और इसे घर बैठे भी किया जा सकता है। पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ई-केवाईसी विकल्प चुनें, अपना आधार नंबर दर्ज करें और मोबाइल पर आए ओटीपी से सत्यापन पूरा करें। यदि किसी को ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत हो तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर भी यह काम करवाया जा सकता है।
बैंक खाते और आधार की भूमिका
इस योजना में बैंक खाते का आधार से लिंक होना भी उतना ही जरूरी है जितना ई-केवाईसी। यदि खाता आधार से नहीं जुड़ा है तो डीबीटी के जरिए पैसा भेजना संभव नहीं होता और किस्त अटक जाती है। किसान अपने बैंक की शाखा में जाकर इस काम को आसानी से करवा सकते हैं, इसके लिए आधार कार्ड और पासबुक साथ ले जानी होगी।
इसके अलावा बैंक खाता सक्रिय होना भी जरूरी है यानी खाते में नियमित लेनदेन होना चाहिए। कुछ मामलों में देखा गया है कि लंबे समय से निष्क्रिय खाते में पैसा आने में देरी होती है या वह वापस लौट जाता है। इसलिए किसान भाइयों को चाहिए कि वे अपना बैंक खाता नियमित रूप से चालू रखें और समय-समय पर बैंक से संपर्क करते रहें।
किस्त का स्टेटस घर बैठे ऐसे देखें
आज के जमाने में किसी भी दफ्तर के चक्कर काटे बिना घर बैठे यह पता किया जा सकता है कि किस्त आई या नहीं। इसके लिए pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाएं और वहां दिए गए बेनिफिशियरी स्टेटस विकल्प पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार नंबर डालें, ओटीपी से सत्यापन करें और सबमिट करते ही सारी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।
यदि किस्त जारी हो चुकी है तो उसका ट्रांजेक्शन विवरण भी वहां उपलब्ध होगा जिसमें तारीख और राशि की पूरी जानकारी होगी। अगर किस्त नहीं आई है तो रुकने की वजह भी उसी पोर्टल पर दर्शाई जाती है जैसे ई-केवाईसी लंबित है या आधार लिंक नहीं है। यह डिजिटल सुविधा किसानों को समय पर जानकारी देती है और अनावश्यक भटकान से बचाती है।
किस्त न मिले तो क्या करें
अगर तय समय के बाद भी खाते में राशि नहीं आई है तो घबराने की जरूरत नहीं है, बस कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे। सबसे पहले पोर्टल पर जाकर स्टेटस जांचें और देखें कि कोई त्रुटि या लंबित प्रक्रिया तो नहीं है। यदि ई-केवाईसी या आधार लिंक की समस्या है तो उसे तुरंत ठीक कराएं और अगर भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है तो राजस्व विभाग से संपर्क करें।
सरकार ने इस योजना के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जहां किसान अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं और समाधान पा सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय कृषि विभाग के कार्यालय और कॉमन सर्विस सेंटर भी इस काम में मदद करते हैं। किसानों को सलाह है कि अपनी समस्या को दबाए न रखें बल्कि तुरंत आधिकारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज कराएं।
किसानों के लिए यह वक्त है सतर्क रहने का
22वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों को इस समय अपने सभी दस्तावेज और प्रक्रियाएं दुरुस्त रखनी चाहिए ताकि किस्त मिलने में कोई रुकावट न आए। ई-केवाईसी, आधार लिंकिंग और भूमि रिकॉर्ड की जांच एक बार फिर से कर लें और जरूरत होने पर तत्काल अपडेट कराएं। यह छोटे-छोटे कदम आपकी किस्त समय पर दिलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के हित में चलाई जा रही एक महत्वाकांक्षी पहल है जो उन्हें आर्थिक रूप से थोड़ा सहारा देती है। इस सहायता का पूरा फायदा तभी मिलता है जब किसान जागरूक हों, अपनी पात्रता सुनिश्चित करें और समय-समय पर अपनी जानकारी अपडेट करते रहें। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना हर पात्र किसान का अधिकार है और इसके लिए सही जानकारी और सतर्कता जरूरी है।








